विज्ञान प्रकृति में छिपे असंख्य रहस्यों को अनावृत्त करता है | पृथ्वी पर जीवन है, इसलिए हमारा अस्तित्व है | पृथ्वी पर जीवन क्यों है, क्योंकि यहाँ एक जीवनदायी वायुमंडल है | इस रहस्य से पर्दा विज्ञान की समझ पैदा होने के बाद उठा | वास्तव में, तथ्यों की खोजबीन और उनका विश्लेषण ही 'विज्ञान' का सार है |
प्रकृति की घटनाएँ कार्य-कारण प्रभाव और पारस्परिक निर्भरता पर आधारित होती हैं | प्रकृति में कोई भी रचना व्यर्थ नहीं है, सबकी कहीं न कहीं जरुरत है | सब एक दूजे से अदृश्य धागों से जुड़े हुए हैं | तार्किक सूझ-बूझ, जिज्ञासु प्रवृत्ति और तथ्यपरक निर्णय लेना वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाता है | इस प्रकार का दृष्टिकोण देश के नागरिकों में होना आवश्यक होता है ताकि वे सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और राष्ट्रीय विकास में भागीदार बन सकें |
वैज्ञानिक दृष्टिकोण शब्द का प्रयोग सबसे पहले पंडित नेहरु ने 1946 में अपनी पुस्तक 'डिस्कवरी आफ इंडिया ' में किया था | उन्होंने भारत को वैज्ञानिक रूप से समृद्ध राष्ट्र बनाने का सपना देखा था | अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने देश के कोने-कोने में प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक शोध संस्थानों की श्रृंखला स्थापित की थी | 1958 में नेहरु जी के नेतृत्व में भारतीय संसद में राष्ट्रीय विज्ञान नीति को पास किया गया | संविधान के अनुच्छेद 51 A (h) में मूल कर्तव्य के अंतर्गत पूछताछ की भावना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवता के विकास को स्थान दिया गया |
पूरी दुनिया विज्ञान और प्रौद्योगिकी की नवीनतम उपलब्धियों को देख रही-मुग्ध हो रही है | विज्ञान हमारे जीवन के हर पल और पहलू को प्रभावित कर रहा है | विज्ञान के आविष्कार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों पृथक मुद्दे हैं | नीति-निर्माता, शिक्षक और वैज्ञानिक के ऊपर नागरिकों को वैज्ञानिक रूप से जागरूक करने की जिम्मेदारी है |
आज भारत में हर साल 200 से अधिक महिलाएं डायन बताकर मार दी जाती हैं | ऐसे में हमारे समाज की वैज्ञानिक जागरूकता का सहजता से अंदाजा लगाया जा सकता है | मीडिया अवैज्ञानिक और निराधार घटनाओं को बेलगाम होकर परोस रही है | करोड़ों लोग अखबार-टीवी के माध्यम से ये अवैज्ञानिक कचरा अपने में आत्मसात कर रहे हैं | अगर इसकी जगह विशुद्ध वैज्ञानिक सूचनाएं उन तक पहुँचती तो शायद नजारा कुछ और ही होता |
विज्ञान संचार आज की जरुरत है | बच्चों-युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास अनिवार्य हो चला है क्योंकि देश की भावी चुनौतियों को उन्हें ही सामना करना है | जलवायु परिवर्तन, जी एम फ़ूड, टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों को जनता को अपने विवेक (वैज्ञानिक दृष्टिकोण) से आत्मसात या तिरस्कार करना होगा |
इंटरनेट आज बेहद प्रभावी और व्यापक दायरे वाला माध्यम हुआ है | पत्रों की जगह ईमेल ने ले लिया है | ब्लॉगों की खोजबीन असंख्य शहरी, उपनगरीय, कस्बाई और ग्रामीण युवा/जनता कर आ रहे हैं | मुझे लगता है कि ब्लॉग को विज्ञान संचारक अपने लक्ष्य समूह तक पहुँचने का एक प्रभावी और सशक्त जरिया बना सकते हैं | इस बीज विचार का अनुसरण करते हुए इस ब्लॉग 'Science For All' का सृजन किया गया है |
'Science For All' एक ऐसा प्लेटफार्म है जिसके माध्यम से प्रारम्भिक रूप में हम विज्ञान संचार से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को उठा रहे हैं - देश में विज्ञान संचारकों कि तलाश, विज्ञान संचार के नवाचारी विचार, विज्ञान संचार कि ख़बरें, देश-दुनिया के विज्ञान संचारकों के अनुभव-उनके साक्षात्कार, जेंडर इश्यु और विज्ञान संचार साहित्य विमर्श |
हम आप सभी पाठकों को 'Science For All' के इस आन्दोलन से जुड़ने के लिए आह्वान करते हैं | आपके बहुमूल्य सुझावों का सदैव स्वागत है | हमारा उद्देश्य है कि आम जन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हो ताकि वे व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय विकास के वाहक बन सकें |
मनीष मोहन गोरे
मनीष जी, बहुत ही अच्छी सोच लेकर चले हैं आप। आप आगे-आगे चलें, पीछे-पीछे कारवां बनता जाएगा।
जवाब देंहटाएं------
कम्प्यूटर से तेज़!
इस दर्द की दवा क्या है....
ब्लॉग को सार्थकता प्रदान करने के लिए कृपया इसे जरूर देखें:
जवाब देंहटाएंब्लॉग के लिए ज़रूरी चीजें!
आप लिखते रहें....हम पढते रहेंगे...
जवाब देंहटाएंविज्ञान मेरा भी पसंदीदा विषय है...
शुभकामनाएं आपके ब्लॉग्गिंग सफर के लिए....
अनु